सवाल आचार्य भगवन् ! मन दूसरों को दिखाने के लिए, आईना की का बोझ लिये घूमता फिरता है कैसे समझाऊँ नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… लाजवाब औरों की गलतिंयाँ मत पकड़ते रहना कभी अपने कान भी पकड़ना वैसे […]

सवाल आचार्य भगवन् ! मन दूसरों को दिखाने के लिए, आईना की का बोझ लिये घूमता फिरता है कैसे समझाऊँ नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… लाजवाब औरों की गलतिंयाँ मत पकड़ते रहना कभी अपने कान भी पकड़ना वैसे […]
सवाल आचार्य भगवन् ! आत्म हत्या को पाप क्यों माना है नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… लाजवाब सुनिये, ध्यान से सुनिये, आत्म हत्या को सिर्फ पाप नहीं महा पाप कहा है ऐसा निधत्ति निकाचित कर्म का वज्र लेप […]
सवाल आचार्य भगवन् ! बेवजह अपनों के ऊपर, गुस्सा उतारता रहता हूँ कैसे संभलूँ ? नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… लाजवाब पश्चात् सिवाय पश्चाताप लगने वाला के कुछ हाथ बरसने के बाद यानि ‘कि कोई तीर न मार […]
सवाल आचार्य भगवन् ! रास्ते से चलता हूँ, फिर भी गाड़ी ठोक ही देता है, कोई न कोई आकर के, बगैर बनाये बैरी बनते जा रहे हैं क्या करूँ नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… लाजवाब लाखों में एक […]
सवाल आचार्य भगवन् ! ‘एक गीत’ आकर जो देखा तो पिंजरा खाली मिला चले जाते पर कह कर तो जाते अलविदा दौड़े दौड़े ही तो आ रहे थे हम कम से कम आँखें अपनी ये सामने तेरे कर लेते नम […]
सवाल आचार्य भगवन् ! ‘एक गीत’ तुम चले गये किधर साथ-साथ जीने-मरने के वादे भुलाकर मुझे रुलाकर तुम चले गये किधर हिचकियाँ तुम्हारी, न हो रही होगी बंद लौट भी आओ तुम्हे तुम्हारी ही सौगंध अय ! मेरे जानो जिगर […]
सवाल आचार्य भगवन् ! ‘एक गीत’ मत भुलाओ मत रुलाओ अब आ भी जाओ देखो भी तो मेरी, ये सूरत रोनी अब हो चली बहुत आँख मिचौनी तुम मुझे, प्यारे हो, जान से भी ज्यादा क्या भुला दिया, ताउम्र साथ […]
सवाल आचार्य भगवन् ! ‘एक गीत’ रह-रह के रुलाये तू मुझे, याद पे याद आये वो मुस्कान तेरी थी जो जान मेरी खुली-खिली कलिंयों को देखते ही तितलिंयों को तू मुझे दे सिहरन जाये रह-रह के रुलाये तू मुझे, याद […]
सवाल आचार्य भगवन् ! ‘एक गीत’ मुड़-कर न आये, जो गये तुम… जाने कहाँ खो गये है भी तो नहीं पंख, लगा-के जिनको खोज लाऊँ मैं तुम्हें एक करके रात और दिन को भिंजा… आँखें ये दो गये तुम… जाने […]
सवाल आचार्य भगवन् ! ‘एक गीत’ जीवन लकीर ले गये, हाथों की मेरी तुम गये क्या गये नींद ले गये, रातों की मेरी सुख दुख के मेरे, अकेले साथिया इक तुम ही तो थे अंधेरे में टिमटिमाते दिया उम्मीद ले […]
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