सवाल आचार्य भगवन् ! आप कहते हैं परिन्दे फुदकते, चहकते आईने हैं क्या मतलब है इसका नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… लाजवाब बच्चे हुये नहीं ‘कि फुर फिर परिन्दे घौंसले की तरफ देखते भी नहीं मुड़ आ तू […]

सवाल आचार्य भगवन् ! आप कहते हैं परिन्दे फुदकते, चहकते आईने हैं क्या मतलब है इसका नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… लाजवाब बच्चे हुये नहीं ‘कि फुर फिर परिन्दे घौंसले की तरफ देखते भी नहीं मुड़ आ तू […]
सवाल आचार्य भगवन् ! उई माँ कहते हैं हम उई पापा क्यों नहीं कहते हैं क्या पापा माँ से कुछ कम हैं नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… लाजवाब कोई किसी से कम नहीं दोंनो बरोब्बर ही हैं कौन […]
सवाल आचार्य भगवन् ! मात्रा माँ सी हो, आपने हाईकू में लिखा है बड़ी अद्भुत खोज है यह नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… लाजवाब कैसी खोज… बचपन से ही देखता तो आ रहा हूँ रोज ‘के बेमौसम खरबूज, […]
सवाल आचार्य भगवन् ! भगवान् से कैसी प्रीत होनी चाहिये ? नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… लाजवाब बच्छा कब रस्ते-रस्ते जाता है कब आहिस्ते-आहिस्ते जाता है माँ को सामने क्या पाता है कुलाछें भरते-भरते जाता है बच्चा बनता […]
श्री योगि-भक्ति विधान वर्धमान मंत्र ॐ णमो भयवदो वड्ढ-माणस्स रिसहस्स जस्स चक्कम् जलन्तम् गच्छइ आयासम् पायालम् लोयाणम् भूयाणम् जूये वा, विवाये वा रणंगणे वा, रायंगणे वा थम्भणे वा, मोहणे वा सव्व पाण, भूद, जीव, सत्ताणम् अवराजिदो भवदु मे रक्ख-रक्ख स्वाहा […]
वर्धमान मंत्र ॐ णमो भयवदो वड्ढ-माणस्स रिसहस्स जस्स चक्कम् जलन्तम् गच्छइ आयासम् पायालम् लोयाणम् भूयाणम् जूये वा, विवाये वा रणंगणे वा, रायंगणे वा थम्भणे वा, मोहणे वा सव्व पाण, भूद, जीव, सत्ताणम् अवराजिदो भवदु मे रक्ख-रक्ख स्वाहा ते रक्ख-रक्ख स्वाहा […]
सवाल आचार्य भगवन् ! किसी का सरनेम काला है, दोषी है, तो किसी का बड़कुल ये तथा गुण यथा नाम हैं या फिर कोई और राज की बात है नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… लाजवाब सुनिये क्या याद […]
सवाल आचार्य भगवन् ! माँ के अलावा भी दूसरा कोई सहजो किरदार है जो भगवान् का हाथ बँटाता हो नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, नमोऽस्तु भगवन्, जवाब… लाजवाब हाँ…हाँ… पूरा परवार निभा रहा किरदार परवर दिगार देखो ठीक बिल्कुल माँ के […]
सवाल आचार्य भगवन् ! ‘एक गीत’ दही दूध-घी के बदले सिक्का खोटा ले आना करके एक का सवाया वापिस लौटा के आना बखूब जानती खूब गैय्या । यूँ ही न कही जाती मैय्या ।। जा वन चरे औषधी पौधे । […]
सवाल आचार्य भगवन् ! ‘एक गीत’ चले गये वो लोग कहाँ गाय को जो कहते थे माँ हँसती गैय्या हँसते थे सिसकती गाय सिसकते थे आहार करा मनुहार भरा गाय को, फिर खुद करते थे थे पहले वो लोग यहाँ […]
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