सवाल आचार्य भगवन् ! धर्म में विश्वास, श्रद्धा, आश कितने महत्वपूर्ण हैं नमोऽस्तु भगवन् नमोऽस्तु भगवन् नमोऽस्तु भगवन् जवाब… लाजवाब सुनिये, विश्वास श्रद्धा आश टिका इन्हीं के बल आकाश जमीन सोखने जुटी जुटा सूरज सुखाने दिल दरिया जो रखता सरकता […]

सवाल आचार्य भगवन् ! धर्म में विश्वास, श्रद्धा, आश कितने महत्वपूर्ण हैं नमोऽस्तु भगवन् नमोऽस्तु भगवन् नमोऽस्तु भगवन् जवाब… लाजवाब सुनिये, विश्वास श्रद्धा आश टिका इन्हीं के बल आकाश जमीन सोखने जुटी जुटा सूरज सुखाने दिल दरिया जो रखता सरकता […]
सवाल आचार्य भगवन् ! वर्तमान शासन नायक वर्धमान भगवान् का अनूठा पुण्य है इसे कैसे प्राप्त कर सकते हैं समाधान कविता में हो तो और अच्छा नमोऽस्तु भगवन् नमोऽस्तु भगवन् नमोऽस्तु भगवन् जवाब… लाजवाब सुनिये, दर्शन, ज्ञान, चारित्र आदि गुण […]
सवाल आचार्य भगवन् ! मैं ग्राम जामनेर का ‘गुरु प्रतिक्षा’ नाम एक छोटी सी कुटिया में रहने वाला व्रति श्रावक हूँ भगवन् हमारे ग्राम से जमुना नदी शबरी के जैसे हाथों की ओट दे कर के भी दूर दूर तक […]
सवाल आचार्य भगवन् ! किस मुँह से कहूँ ‘के कल रात नन्हे मुन्हें बच्चों के लिये कहानिंयाँ सुना रहा था मैं मेरी बच्ची के भी बच्चे आये हुये थे घर पर उनमें से एक बच्चे ने मुझसे पूछा नाना जी […]
सवाल आचार्य भगवन् ! मानते हैं किन्हीं सन्त को ‘गुजरात केशरी’ इसलिये कहते हैं चूँकि उन्होंने केशरी यानि ‘कि सिंह के जैसा जैन अहिंसा धर्म का बिगुल बजाया, शंखनाद किया, निडर हो करके सारे गुजरात राज्य में पंचरंगा लहराया किन्हीं […]
सवाल आचार्य भगवन् ! मुरारी तो कृष्ण जी को कहते हैं है ना लेकिन भगवन् सिंरोज के पास एक ग्राम है जिसका नाम है मुरारिया जहाँ पर जैनों की सिक्का चलता है जिस किसी दिशा में कदम बढ़ा लो जमीन […]
अ = विष्णु, शिव, ब्रह्मा, वायु, अग्नि आ = हाँ स्वीकृति, दया (आह), पीड़ा, खेद, स्वयंभू इ = कामदेव, क्रोध, पुकार, करुणा, झिड़की, आश्चर्य ई = कामदेव, खिन्नता, पीड़ा, शोक, चेतना, संबोधन, लक्ष्मी उ = शिव, ईश्वर, पुकार, क्रोध, आदेश […]
श्री सिद्ध जी सार्थक नाम है सिद्ध भगवान का, जो जो अभीष्ट था, वह सिद्ध कर लिया जिन्होंने वे यथा नाम तथा गुण सिद्ध भगवन्त हैं वह क्या ? तो ‘सु’ यानि ‘कि अच्छा लगे ‘ख’ यानि ‘कि इन्द्रियों के […]
उत्तम ब्रह्मचर्य (१) उत्तम ब्रह्मचर्य मतलब कछुआ भीतर यदि आप पूछते ही है उससे ‘के क…छुआ भीतर तब जबाब लाजवाब देता है वह ‘के कछु…आ भीतर सच पढ़ा कखहरा कछुआ (२) ‘रे गा आमीन न सिर्फ ग्रामीण जो ब्रह्म को […]
आकिंचन्य (१) आकिंचन्य मतलब नफरत नहीं रखना किसी से भी मतलब नहीं रखना (२) आकिंचन्य मतलब पीठ के पीछे अपनी नाक से आगे अपना कुछ नहीं है किञ्चित मात्र भी, कुछ भी (३) यदि आप पूछते ही हैं आकिंचन मतलब […]
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