सवाल आचार्य भगवन् ! चाँद को लाकर, कदमों में कर देता है खड़ा औरों की खातिर, वह एक...
सवाल आचार्य भगवन् ! देेख सफेद चादरा, लोग बाग कीचड़ उछालने से बाज नहीं आते हैं...
सवाल आचार्य भगवन् ! आप सुभग कहते हैं अपनों के लिए, और दुनिया ठग कहती है आप...
सवाल आचार्य भगवन् ! आप कहते हैं भगवान् माँ का किरदार निभाते हैं पर लगता है...
सवाल आचार्य भगवन् ! न दिशा दिशा विदिशा भी, आवाज देती है, सत्संग करो, संत के पास...
सवाल आचार्य भगवन् ! आप कहते हैं तीसरी, भीतरी भीतरी हो तो शब्द सब, ‘द’ यानि...
सवाल आचार्य भगवन् ! क्या कमजोर भी, बल-जोड़ के लिए मात दे सकता है नमोऽस्तु...
सवाल आचार्य भगवन् ! आप धम्म-धम्म करके चलने से, मना क्यों करते हैं नमोऽस्तु...
सवाल आचार्य भगवन् ! आहिस्ते चले कभी, हो कभी हाँपते चले, छोटी से छोटी घड़ी...
सवाल आचार्य भगवन् ! खिलता ‘कि मुरझाने लगता फूल, करने कबूल, चाहिये जो भीतरी,...
सवाल आचार्य भगवन् ! बड़े सवालात क्यों उठाते हैं लात एक या दो उठाई जा सकती,...
सवाल आचार्य भगवन् ! जाने क्यों मन क…ख…ग नहीं चुनता है, ‘घ’ खाने में...
