अरह-नाथ वृहद-चालीसा दोहा अर यानी तुम नाम है, कुछ हटके तिहु-लोक । काम बना होगा तभी, जन-जन देता ढ़ोक ।। चौपाई...
मल्लि-नाथ वृहद-चालीसा दोहा सुना लगाते पार हो, काँधे बैठा आप । रसिक न यूँ ही ‘जग-जुबां’, ‘जयतु मल्ल-जिन’...
मुनि-सुव्रत-नाथ मुनि-सुव्रत-नाथ मुनि-सुव्रत-नाथ मुनि-सुव्रत-नाथ मुनि-सुव्रत-नाथवृहद-चालीसा दोहादुखिंयों...
सवाल आचार्य भगवन् ! क्या सूर्य, क्या भोर, क्या विभोर क्या ब्रह्म-मुहूर्त, क्या आधी रात, भगवन् ! आपको किसी ने भी...
सवाल आचार्य भगवन् ! लोग-बाग आपके प्रवचन, मंत्र मुग्ध होकर सुनते रहते हैं, सुनने के बाद सभी को कहते सुना है,...
सवाल आचार्य भगवन् ! आपकी आँखों में जब-तब करुणा ही एक, स्थाई निवसी रहती है, भगवन् ! ऐसा क्या है करुणा में, जिसे...
सवाल आचार्य भगवन् ! मारुति जी आपके बाल सखा हैं बड़े ही सीधे-साधे, सरल हृदय सहज-निराकुल व्यक्तित्व के धनी हैं...
सवाल आचार्य भगवन् ! आप दिन रात पढ़ाते हैं शिष्यों को लेकिन परीक्षा न मौखिक लेते हैं और न हीं लिखित ही फिर आप...
सवाल आचार्य भगवन् ! और किसी की न सही, पर श्री मद् आचार्य देेव, गुरु ज्ञान सागर जी की तो, आती ही आती होगी याद, आप...
नमि-नाथ नमि-नाथ नमि-नाथ वृहद-चालीसा दोहा भीतर बाहर रख रहे, ‘नमी’ नाम अनुरूप । कोटि-कोटि वन्दन तिन्हें,...
नेमिनाथ वृहद-चालीसा ‘दोहा’ राज तजा, राजुल तजी, सुन पशुअन आवाज । धन आदर्श हमार वो, नेम-नाथ जिनराज ।। चौपाई...
पार्श्वनाथ वृहद-चालीसा दोहा- क्षमा भावना से भरे, मान कमठ हरतार । तेइसवे तीर्थेश को, नमन अनन्तों बार ।।...
